‘सांस्कृतिक गतिविधियां’ भारत के संविधान द्वारा पंचायतों को हस्तांतरित 29 विषयों में से एक है। भारत में अपार महत्व की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत हैं। यह मानते हुए कि भारत की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत का अधिकांश भाग ग्रामीण क्षेत्रों में निहित है, पंचायती राज मंत्रालय द्वारा ‘पंचायत धरोहर पहल’ की संकल्पना की गई है। इस पहल का उद्देश्य राज्य/ केंद्र शाषित प्रदेश की सरकारों के पंचायती राज विभागों के सहयोग से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित ‘निर्मित धरोहर स्थलों’ और ‘अन्य सांस्कृतिक परिसंपत्तियों’ की पहचान करना, उनका दस्तावेजीकरण करना और उन्हें बढ़ावा देना है।
इस पहल का उद्देश्य देश की ग्रामीण सांस्कृतिक विरासत की पहचान, दस्तावेजीकरण और संवर्धन की प्रक्रिया में पंचायत स्तर पर जमीनी शासन को मुख्यधारा में लाना भी है, जिससे सामुदायिक स्वामित्व, गर्व और ग्रामीण- विरासत के सतत संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय समुदायों को अपनी सांस्कृतिक संपदा की रक्षा और उत्सव मनाने के लिए सशक्त बनाया जाएगा। यह पहल भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के ‘मेरा गाँव मेरी धरोहर’ पोर्टल के अद्यतनीकरण के लिए सूचना प्रदान करने का भी लक्ष्य रखती है।
इस पहल के तहत पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार और संबंधित राज्यों/केंद्र शाषित प्रदेशों के पंचायती राज विभाग के सक्रिय और सहयोगी प्रयासों के साथ ग्राम पंचायत स्तर पर महत्वपूर्ण “निर्मित धरोहर स्थलों” और “रुचि के स्थानों” की पहचान की जा रही है और उनका दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। इनका विवरण निम्न है:
1. किन्नौर जिले के विरासत स्थलों पर “किन्नौर- वेयर गॉड्स वॉक द वैलीज़” (जहाँ देवता रमण करते हैं) शीर्षक से एक सचित्र पुस्तक पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार और पंचायती राज विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई है, जिसे 24.12.2025 को विशाखापत्तनम में ‘पंचायत अनुसूचित क्षेत्र तक विस्तार अधिनियम (पेसा) दिवस’ पर जारी किया गया।